Author: M Qaisar Siddiqui

  • दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र आज ईमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री का उप राज्यपाल को भेजा गया।

    प्रैस विज्ञप्ति
    आज दिल्ली के विभिन्न महिला संगठनों की दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल को सौंपा गया ।दोनों ही कार्यालयों से महिला संगठनों के प्रतिनिधियों को मिलने का समय मांगा गया परंतु जब समय नहीं दिया गया तो यह मांग पत्र ईमेल द्वारा भेजा गया । अधोहस्ताक्षरी संगठनों द्वारा जारी किए गए मांग पत्र में मांग की गई है कि:

    1.बेरोजगार , बेघर , आश्रय घरों इत्यादिमें रहने वाली महिलाओं को खाना ​लगातार मुहैया कराया जाए 2.दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों को फिलहाल दिसंबर महीने तक मुफ्त राशन दिया जाएl​ ​3दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को ₹10000 की विशेष राहत राशि प्रदान की जाए। यह राशि प्रति माह उनके बैंक खाते में दी । जिन महिलाओं का बैंक खाता नहीं है उनका खाता बिल्कुल सरल व सहज प्रक्रिया द्वारा बैंकों द्वारा स्वयं खोला जाए। एसडीएम कार्यालय ,रिहायशी इलाकों में इसके लिए विशेष कैंप लगाए जाएं। इस खाते मेंन्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त ना हो।लॉकडाउन की अवधि सहित करोना काल में यह आर्थिक सहायता जारी रहे।4.सभी महिला पेंशनधारकों को रुकी हुई पेंशन के साथ-साथ ₹5000 की लॉकडाउन अवधि की सहायता दी जाएदिल्ली सरकार द्वारा घोषित₹1000 की अतिरिक्त राशि सभी दिव्यांग वृद्ध विधवा एकल महिला पेंशनधारियों के खाते में अविलंब हस्तांतरित की जाए।

    5.छात्राओं को विशेष अनुदान दिया जाए जिससे वे मोबाइल नेटवर्क संबंधी डाटा रिचार्ज संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें।6.शिक्षा के लिए जो कर्ज लिए गए हैं उन्हें माफ किया जाए। 7.छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए विशेष अनुदान राशि दी जाए। 8.निजी स्कूलों में, व कॉलेजों को ट्यूशन फीस के अलावा दूसरी फीस ना लेने की निर्देश दिया जाए औरउसकाउल्लंघन करने की स्थिति में उन पर कारवाई की जाए।9.स्कूलों में मिड डे मील तथा स्वास्थ्य सुविधाएं जैसेआयरन टेबलेट सैनिटरी पैड्स देने के कार्यक्रम को लगातार जारी रखा जाए10.प्रत्येक मोहल्ला क्लीनिक, डिस्पेंसरी तीन शिफ्ट में चलाई जाए में विशेषज्ञों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक व्यक्ति को मुफ्त व् गुणवत्तापूर्ण इलाज कराया जाए। तथा कोविड-19 निशुल्क जांच यहां पर सुनिश्चित की जाए।11.सभी फ्रंटलाइन करोना कर्मियों को अविलंब पीपी ई किट दी जाए। सफाई कर्मचारियों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी करोना के खिलाफ अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के रूप में शामिल किया जाए।सभी को समय पर तनख्वाह मिले। पर्याप्त छुट्टी मिले, काम के दौरान पर्याप्त अवकाश मिले यह सुनिश्चित किया जाए. मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार की जिम्मेदारी सरकार उठाए। 12आशा कार्यकर्ताओं को कुशल कामगार का दर्जा दिया जाए13गर्भवती महिलाओं की सभी अस्पतालों में जांच की उचित व्यवस्था की जाए14 गर्भवती महिलाओं को मातृत्व सहायता राशि अविलंब उपलब्ध करवाई जाए बिना किसी शर्त के अभी केवल पहली प्रसूति के लिए ही यह राशि उपलब्ध है ।15गर्भवती महिलाओं को ,स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोविड जांच के नाम पर अस्पतालों में भटकाना बंद किया जाए.व उनके लिए यह जांच प्रसूति केंद्र पर ही उपलब्ध करवाई जाए।16बड़े निजी व कॉर्पोरेट अस्पतालों को सरकार अपने अधीन ले ताकि दिल्ली की महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सके।17असहमति (dissent) के अधिकार पर प्रहार बंद करो ।18सी ए ए विरोधी प्रदर्शनकारियों को अविलंब रिहा करो। 19यूएपीए रद्द करो। 20जेल में कैदियों को स्वास्थ्य की सुरक्षा की गारंटी करो।​

    सभी महिला संगठनों में मांगों पर दिल्ली में विभिन्न बस्तियों में लगातार संघर्ष के कदम उठाने का निर्णय करते हुए 2 अक्टूबर को जंतर मंतर पर एक केंद्रीय कार्यक्रम करने का भी निर्णय लिया है।
    जारीकर्ता
    दीप्ति भारती _नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमन दिल्ली इकाई,
    पूनम कौशिक _प्रगतिशील महिला संगठन दिल्ली,
    आशा शर्मा_अखिलभारतीय जनवादी महिला समिति,
    आरती__संघर्षशील महिला केंद्र,
    रितु कौशिक _अखिल भारतीय सांस्कृतिक महिला संगठन,
    कुसुमलता सहगल _स्वास्तिक महिला समीति ।
    दिल्ली
    सितंबर 21,2020

  • बिहार विधानसभा चुनाव:शिकारी आएगा,जाल बिछाएगा,दाना डालेगा,भूल से फंसना नहीं

    चुनाव में बिहार के मुस्लिम समुदाय के लिए चुनौती

    *शारिब जि़या रहमानी*
    जदयू ने अपनी मुस्लिम फौज चुनावी मैदान में उतार दी है,इस से समझ आता है कि नीतीश कुमार कितने डरे होए हैंI मुस्लिम वोट अगर 100% जदयू से हट गया तो जदयू की सत्ता वापसी नामुमकिन है, बीजेपी से अलग नीतीश कुमार का अपना कोई वोट जनाधार नहीं है, और Covid19 पर विफलता और ग़रीब , मज़दूर के ग़ुस्से से वो परेशान हैं, जिन की घर वापसी का नीतीश ने विरोध किया था और किसी तरह आने के बाद भी सिर्फ़ जुमले बाज़ी होती रही, अब वे वापस जाने को मजबूर हैं, बेरोज़गारी मुद्दा बन जाए इस से वो परेशान हैं, सैलाब से हर साल तबाही आती है, सरकार विफल रहती है, पिछली घोषणाओं पर कोई जवाब नहीं है लकिन लुभावन जुमले बरस रहे हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस,पोस्टरों द्वारा नीतीश को मुसलमानों का मसीहा कहा जारहा है,हरगिज़ उन की जाल में नहीं आना है। वो तरह तरह से जुमले छोड़ेंगे, अगर इस बार इस पार्टी को वोट दे दिया तो CAA पर आप का आंदोलन, आप की जागरुकता की विशाल मुहिम बर्बाद होगी और वो समझेंगे कि मुसलमानों के साथ कुछ भी करो, वोट तो दे ही देंगे, इस बार इस रिवायत को बदलना हैI ऊर्दू को अनिवार्य विषय से हटा कर नीतीश कुमार ने उर्दू बल्कि अपने मुस्लिम विरोधी होने पर मुहर लगाई है,बार बार इस विषय पर ध्यान दिलाया जा रहा है, शिक्षा मंत्री को मेमोरेंडम दिए जा रहे हैं लेकिन नीतीश और उन के मुस्लिम चमचों पर कोई असर नहीं है, उर्दू अनुवादक और सहायक अनुवादक की परीक्षा टाल दी गई, यानी इस की घोषणा सिर्फ़ वोट लेने और चुनावी धोखे बाज़ी के लिए थी तभी तो बिहार स्टाफ़ सिलेक्शन कमिशन की वेबसाइट पर सारी चीजें अपलोड हो रही हैं लकिन अनुवादक परीक्षा पर चुप्पी हैI याद रहे जो भी जदयू का मुस्लिम चेहरा आप के पास आए या सोशल मीडिया पर गुण गान करे उससे CAA पर वोटिंग पर सवाल करें,जदयू की वजह से यह बिल Act बना हैI वे आपको बताएँगे कि बिहार सरकार ने NRC और NPR पर प्रस्ताव पारित कर दिया है कि बिहार में 2010 का NPR होगाI

    याद रहे कि यह धोका है,NPR 2010 वाला हो या 2020 वाला, दोनों नागरिकता Act से जुड़े हैंI जिस के साथ NRC भी है यानी जब NPR होगा तो NRC भी होगी,जब तक उसे नागरिकता से अलग नहीं किया जाता, CAA के साथ NPR ख़तरनाक है, क्यूँ कि धर्म के नाम पर नागरिकता मिलोगी और नागरिकता धूमिल की जाएगी जो संविधान के सिद्धांत, लोकतंत्र, एकता और बराबरी के ख़िलाफ़ है और जदयू ने इसे पास कराया है।

    एक और बात कि NRC लागू करने से बिहार सरकार कैसे मना कर सकती है? जदयू के मुस्लिम नेताओं के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि NRC लागू ना करना स्टेट का संविधानिक अधिकार ही नहीं है यानी जिस का अधिकार नहीं उस पर प्रस्ताव पारित हो रहा है और जहाँ वोट ना देने का अधिकार था वहाँ (पार्लियामेंट में) जदयू बिल पारित करवाती है, मुसलमान को इतना बेवकूफ़ ना बनाएं, मुसलमानों ने बदला लेने का मन बना लिया है, मुस्लिम वोट लेकर बीजेपी की गोद में बैठ कर जो धोका नीतीश कुमार ने दिया है वो भी याद है, बिहार में जगह जगह मुस्लिमों को निशाना बनाया गया, मुस्लिम असुरक्षित हैं, नीतीश राज में माब लिंचींग बढ़ी, फुलकारी, औरंगाबाद, सीतामढ़ी सब याद हैं, इनका जवाब जदयू के मुस्लिम बहादुर नहीं दे सकते हैं लकिन सब का हिसाब मुस्लिम, वोट से लेंगे, उन्हें सब याद हैIजदयू के प्रचारकों से जवाब लेना होगा।

    नीतीश कुमार की मुस्लिम और उर्दू विरोधी नीति से उनकी अस्ल छवि सामने आगई है,इस बार हर सीट पर जदयू के प्रत्याशी को हराने की नीति अपनानी होगी और महागठबंधन को उन्हीं जगह मजबूरी में वोट करना है जहां मजलिस का मज़बूत प्रत्याशी ना हो, तेजस्वी की मानसिकता को देखते हुए मजलिस का मैदान में होना अनिवार्य है लकिन मजलिस को भी 10/12 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारना चाहिए,और बहुत मज़बूत लड़ाई चिन्हित सीटों पर होनी चाहिएI ताकि ज़्यादा सीटों पर मुस्लिम वोट के बट जाने से एनडीए को फ़ायदा भी ना हो और मुस्लिम नुमाइंदगी भी हो जाए।

    किसी भी तरह जाल में नहीं आना हैI वोट देते समय दिल पर हाथ रख कर महसूस कीजिए गा कि जिस दिन आप के वोट को लात मारकर नीतीश बीजेपी के साथ गए थे तो आप को कैसा लगा था? जब जदयू पार्लियामेंट में CAA पर वोट दे रही थी तो ख़ुद को आप कैसा ठगा महसूस कर रहे थे? तीन तलाक़ बिल पर पार्लियामेंट से भाग कर बिल को वो पारित कराने में मदद कर रही थी तो आप का दिल किया कह रहा था?

    हाँ आरजेडी गठबंधन से भी सवाल करते रहना है कि मुस्लिम ईशू पर पार्टी की किया पॉलिसी है? कितनी नुमाइंदगी दे रहे हो?आरजेडी में मुस्लिम लीडरशिप पनपने क्यूँ नहीं दी जाती है? वोट लेने के लिए मुस्लिम और विकास और मंत्रालय के लिए यादव? यादव ने लोकसभा चुनाव में आरजेडी को वोट नहीं दिया है, तेजस्वी इस पर चुप क्यूँ हैं? मुस्लिम इशू से उन्हें दिलचस्पी क्यूँ नहीं है? क्या मुस्लिम को वोट की मशीन और मजबूर समझ लिया है? इसलिए 10/12 मजलिस के मज़बूत उम्मीदवारों को वोट देकर आरजेडी का ग़ुरूर भी तोड़ना ज़रूरी है।

    मजलिस से भी सवाल है कि तेलंगाना में 7/8 और महाराष्ट्र,उप, बिहार में पार्टी विस्तार क्यूँ? तेलंगाना की तरह बिहार में भी 7/8 पर प्रत्याशी क्यूँ नहीं उतारते? KCR की पार्टी और उस की पॉलिसी, कॉग्रेस, आरजेडी,एसपी, एनसीपी से अलग कैसे है? जो नरसिम्हा रॉ के प्रेम में गिरफ़्तार है, KCR के कमयूनल एजेंडे पर चुप्पी रहती है लकिन सारी बहादुरी और ईमानी गर्मी तेलंगाना से बाहर निकलने लगती है? KCR को कमयूनल बोलने की हिम्मत ओवैसी में क्यूँ नहीं है? तेलंगाना में दोस्त के हाथों शहीद मस्जिदों पर भी मजलिस को जवाब देना होगा।
    कहना यह है कि सभी पार्टियों को आईना दिखाना है,यानी वोट देना भी है तो फ़्री में नहीं, जाग कर वोट देंगे, सिर्फ़ वोट की मशीन नहीं बनेंगे, अब तक की हमारी सियासी ग़लती यही है कि हम वोट बैंक बनते रहे, सवाल करना और हिसाब लेना नहीं सीखाI सियासत में सौदेबाज़ी और मोल भाऊ का महत्व है, जो जितना बड़ा डीलर होगा उतना बड़ा नेता समझा जाएगा, सियासत के लिए अब कोई उसूल और सिद्धांत नहीं है,आज की सियासत बेऊसुली का नाम हैI किसी भी पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है और ना अब कोई सिकूलर है। मुस्लिम समुदाय को भी यही रास्ता चुन्ना होगा।

  • केंद्र की मोदी सरकार किसान विरोधी कानून को रद्द करें,पंजाब के अल्पसंख्यक किसान भाइयों के साथ है:शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट) : आज यहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने से पहले अपने सप्ताहिक संबोधन में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए किसान विरोधी कानून की निंदा करते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि किसान हमारे भाई हैं वह सिर्फ भारत को ही नहीं दुनिया भर के लोगों को अनाज मुहाईया करवाते हैं उनके साथ केंद्र सरकार की ओर से की जा रही मनमर्जी बर्दाश्त नही की जा सकती।

    शाही इमाम ने कहा कि पंजाब के किसान जो भी रणनीति अपनाएंगे पंजाब के सभी अल्पसंख्यक उसमें उनका साथ देंगे। उन्होंने कहा कि किसानों ने हमेशा ही हक और इंसाफ के लिए आवाज उठाई है इसलिए सभी भारतीयों पर यह फर्ज है कि वह इस मुश्किल घड़ी में अपने किसान भाइयों का साथ दें शाही इमाम ने कहा कि किसानों का साथ देना कोई सियासी मामला नहीं यह किसानों कि जिन्दगी का सवाल है कयोंकि खेती ही उनका जीवन है। शाही इमाम ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून से किसानों के ऊपर बाहर की कंपनियों का दबाव बढ़ जाएगा काला बाजारी बढ़ेगी इससे किसान तरक्की करने की बजाय मायूसी की तरफ चला जाएगा।

    सरकार को चाहिए कि वह किसानों के साथ बैठकर बातचीत करें और किसानों के मुताबिक ही नया कानून बनाया जाऐ। शाही इमाम ने आज जामा मस्जिद लुधियाना से राज्य के सभी इमाम साहिबान और मस्जिदों के प्रधानों को अपील जारी की है कि किसान भाइयों की तरफ से किए का रहे आंदोलन में शामिल होकर हर तरफ से साथ दें। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब के किसान सिर्फ किसान नहीं हक और सच्चाई की बुलंद आवाज भी हैं किसानों ने हमेशा ही सभी लोगों का साथ दिया इसलिए आज सब पर लाजमी है कि किसान भाइयों का साथ देकर काले कानून को रद्द करवाऐं।

  • उमर ख़ालिद की गिरफ़्तारी पर जयपुर में विरोध प्रदर्शन, उठी UAPA रद्द करने की गूंज।

    जयपुर। भारत की राजधानी दिल्ली में फ़रवरी में हुए नागरिकता कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शन के बाद नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के कई इलाकों में भड़के सांप्रदायिक दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने बीते रविवार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को गिरफ्तार कर लिया। खालिद पर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के अलावा 18 अन्य धाराएँ लगाई गई हैं जिसके बाद उन्हें सोमवार को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

    उमर की गिरफ्तारी के बाद देश के कई हिस्सों से तमाम जानी मानी हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्यवाही के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया, इसी क्रम में मंगलवार (15 सितंबर) को जयपुर के गांधी सर्किल पर प्रदेश की स्टूडेंट कम्युनिटी की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया गया।

    प्रदर्शन में विरोध दर्ज कराने पहुंची CPI नेता निशा सिद्धू ने कहा कि, दिल्ली दंगों में पुलिस की कार्यवाही पूर्वाग्रह से ग्रसित है, जिसको गिरफ्तार करना चाहिए वो तो खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस तमाम छात्रों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर हमारी आवाज़ दबाना चाहती है, जो लोकतंत्र में संभव नहीं है।

    वहीं मजदूर किसान शक्ति संगठन के मुकेश गोस्वामी ने कहा कि, देश के प्रधानमंत्री तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस दंगा भड़काने वालों की चापलूसी कर रही है जिसकी आड़ में निर्दोष लोगों को जेलों में भरा जा रहा है. उन्होंने राजस्थान पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि” अशोक गहलोत और अमित शाह की पुलिस में कोई फ़र्क़ नहीं रह गया. कांग्रेस को समझ लेना चाहिए कि उन्हें अब प्रताड़ितों के साथ खड़ा होना ही होगा”। इसके साथ ही राजस्थान समग्र सेवा संघ के सवाई सिंह का कहना था कि देश में लोकतंत्र का गला घोटा जा रहा है, विरोध की आवाज़ उठाने वाले देशद्रोही बनाये जा रहे हैं।

    मालूम हो कि उमर खालिद पर CAA के खिलाफ दिल्ली में दंगा फैलाने की साजिश के आरोप लगे हैं। पुलिस के मुताबिक खालिद ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की यात्रा के दौरान लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। हालाँकि दिल्ली पुलिस की दंगों पर की जा रही जाँच पर सवाल उठ रहे हैं।

    सामाजिक कार्यकर्ता राशिद हुसैन ने कहा की “ नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ पूरे देश में शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें सभी धर्मों की संविधान संरक्षण की वकालत करने वाले लोग शामिल हुए. लेकिन भाजपा नेताओं ने अनर्गल बयान दिए जिससे साम्प्रदायिकता बढ़ी और दंगे भड़क उठे.” वहीं विरोध प्रदर्शन में नागरिक मंच से अनिल गोस्वामी, CPM नेता संजय माधव, AIRSO नेता रितांश आज़ाद, राशिद हुसैन, विजय स्वामी, मानस भूषण, अहमद कासिम जैसे कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीरे धीरे सचिन पायलट खेमे को कमजोर करने मे कामयाब होते नजर आ रहे है!

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।राजस्थान कांग्रेस मे पीछले दो महीनों की उठा-पटक के बाद कांग्रेस हाईकमान द्वारा गहलोत-पायलट खेमे को एकजुट करने का संकेत देने के बावजूद दोनो नेताओं मे चली आ रही अदावत का रुप बदलने के बावजूद उसी तरह अदावत आज भी जारी है। पहले उक्त दोनो नेताओं मे मुकाबला उन्नीस-बीस का था लेकिन जब से पायलट से उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद छीना गया है तब से मुख्यमंत्री गहलोत का पलड़ा काफी भारी होता नजर आ रहा है।

    पार्टी कार्यकर्ताओं व जनता की भावनाओं के विपरीत केवल मात्र विधायकों को खुश रखकर उनके बल पर अपनी सरकार चलाकर जैसे तैसे करके पूरे पांच साल मुख्यमंत्री पद पर चिपके रहने के माहिर अशोक गहलोत पीछले अपने दो मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद आम चुनाव मे कांग्रेस के बूरी तरह हारने से कोई सबक लिये बीना इस दफा भी उन सब पुरानी गलतियों से बढकर अब भी गलती कर रहे है जो पहले करते आये है। गहलोत सरकार के गठन को करीब दो साल होने को आने के बाद भी आम जनता मे इस बात पर एक राय है कि अगले आम विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस का बूरी तरह हारना तय है केवल बहस इस बात पर हो रही है कि कांग्रेस दस सीट तक जीत पायेगी या नही।

    गहलोत जब जब मुख्यमंत्री बनकर सत्ता मे आये है तब तब उन्होंने अपनी विपक्षी पार्टी भाजपा को कमजोर करने की बजाय अपने ही दल मे उनके स्वयं के मुकाबले उभरने वाले नेताओ को कमजोर करने मे सत्ता के पावर की ताकत का भरपूर उपयोग करते आये है। गहलोत अपने इस वर्तमान कार्यकाल मे भी पुराने इतिहास को दोहराते हुये शूरुआत से ही सचिन पायलट को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने मे अपनी पुरी ताकत लगाते आ रहे। सचिन पायलट को कमजोर करने मे अशोक गहलोत को अब तक काफी कामयाबी भी मिलती नजर आ रही है।

    1998 मे अशोक गहलोत के पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको अब तक प्रदेश अध्यक्ष के रुप मे केवल सीपी जोशी व सचिन पायलट से ही चेलेंज मिल पाया था। वर्तमान अध्यक्ष डोटासरा सहित बाकी सभी बने अध्यक्ष गहलोत की दया के पात्र के तौर पर ही साबित हुये व हो रहे है। यानि जोशी व पायलट को छोड़कर बाकी सभी की स्वयं विवेक अनुसार राय ना होकर वही राय रही जो मुख्यमंत्री गहलोत की राय रही व है।

    मुख्यमंत्री गहलोत अपने मुकाबिल कांग्रेस मे खड़े होने वाले सचिन पायलट को कमजोर करने मे तब से लगे हुये थे जब वो प्रदेश अध्यक्ष बने थे। अभी दो महीने पहले सम्पन्न राज्यसभा चुनाव के समय सचिन पायलट को कमजोर करने का मुख्यमंत्री गहलोत का पहला प्रयास विफल होने के बावजूद लगातार मोके की तलाश मे गहलोत रहे। दुसरा प्रयास पायलट व कुछ विधायको के दिल्ली जाने की खबर के साथ अपने खास महेश जोशी द्वारा ऐसीबी व एसओजी मे 124-A सहित अन्य गम्भीर आरोपो मे प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अपने समर्थक विधायकों की बाड़ेबंदी करके अपने पक्ष व पायलट के विरोध मे माहोल बना कर अचानक पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर अपने पिछलग्गू गोविंद डोटासरा को अध्यक्ष बनाकर बडी कामयाबी हासिल करके पायलट खेमे की कमर तोड़ दी। इसके बाद पायलट, रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह के मंत्री पद से हटने के बाद 13-सितम्बर को जिले के प्रभारी मंत्रियों का जिला बदलकर इस तरह कामयाबी पाई कि पायलट व उनके समर्थक विधायकों के प्रभुत्व वाले जिलो का प्रभारी मंत्री उनको बना दिया जो मुख्यमंत्री के खासम खास है।जो अब मुख्यमंत्री की मंशा अनुसार रिपोर्ट तैयार करते रहने के साथ साथ पायलट खेमे पर नजदीक से नजर रख पायेंगे।इससे उन जिलो मे धीरे धीरे पायलट समर्थक विधायकों का प्रभाव भी कम किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा अब तमाम राजनीतिक नियुक्तियों का कार्य भी जल्द पुरा कर लेने की सम्भावना है। पहले प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट राजनीतिक नियुक्तियों के मनोनयन मे गहलोत से अलग मत रखकर हिस्सेदारी की बात करते थे। अब डोटासरा के अध्यक्ष बनने के बाद गहलोत की बल्ले बल्ले है। अब मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाले तमाम फैसलो मे डोटासरा की केवल मात्र हां होगी , किसी तरह की ना नुकर किसी हालत मे डोटासरा की नही होना माना जा रहा है।

    कांग्रेस के केन्द्रीय स्तर पर सगठन मे पीछले दिनो हुये बदलाव मे सचिन पायलट को दूर रखकर अशोक गहलोत को बडी सफलता मिलना माना जा रहा है। अब मुख्यमंत्री राजस्थान मे होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों मे पायलट समर्थकों को पूरी तरह किनारे लगाते हुये अपने खास लोगो का मनोनयन करके करने जा रहे है। मुख्यमंत्री स्तर पर चयनित नामो पर हां कहना ही वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष के पास केवल मात्र विकल्प माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत अपना बचा कार्यकाल भी जनता की भावनाओं की परवाह किये वगैर केवल मात्र विधायकों को खूश रखने के वो सब काम करेगे जो जरुरी है। साथ ही वो अब पार्टी की मजबूती के बजाय सचिन पायलट को निचले पायदान पर धकेलने के प्रयास को तेजी देगे। फिर भी देखते है कि गहलोत-पायलट मे तू ढाल ढाल मै पात पात की जंग मे कोन कितना एक दुसरे को कमजोर कर पाते है।

  • प्रभारी महामंत्री अजय माकन के राजस्थान के फीडबैक कार्यक्रम मे पीसीसी सदस्य शरीफ की आवाज से कांग्रेस हलके मे हड़कंप।

    ।अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।राजस्थान के नव मनोनीत प्रभारी कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री अजय माकन द्वारा प्रदेश के अलग अलग सम्भाग के फीडबैक कार्यक्रम के तहत 10-सितंबर को जयपुर सम्भाग के जिलेवार फीडबैक लेने के सिलसिले मे सीकर जिले के नेताओं व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिये जाते समय पीसीसी सदस्य मोहम्मद शरीफ द्वारा मुस्लिम समुदाय के सम्बन्धित सवाल खड़े करने के साथ माकन को दिये गये पार्टी हित मे उनके सुझावों के बाद वायरल उनके वीडियो से राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे हड़कंप मचा हुवा है।

    कांग्रेस कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ ने प्रभारी महामंत्री अजय माकन, अचानक बने प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा व प्रभारी सचिव एवं अन्य सीनियर नेताओं की मोजूदगी मे कहा कि मुस्लिम समुदाय चुनावो के समय बडी तादाद मे कांग्रेस के पक्ष मे मतदान करके कांग्रेस सरकार के गठन मे अहम किरदार अदा करता है। लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हे सत्ता मे उचित हिस्सेदारी नही मिलती है। प्रदेश मे कांग्रेस के नो मुस्लिम विधायक होने के बावजूद केवल मात्र एक विधायक शाले मोहम्मद को मंत्री बनाकर उन्हें अल्पसंख्यक मंत्रालय तक सीमित करके रखना ठीक नही। शरीफ द्वारा मुस्लिम विधायकों मे से दो केबिनेट व दो राज्य मंत्री बनाने की मांग करते हुये उन्हें मेन स्टीम वाले विभागों का प्रभार देने की मांग कर डालने के बाद एक तरह से उस समय हाल मे सन्नाटा पसर गया।

    मोहम्मद शरीफ ने अपनी बात माकन को सम्बोधित करते हुये जारी रखते हुये कहा कि जब वो जनता मे जाते है तो मुस्लिम समुदाय के लोग उनसे सवाल करते है कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक नियुक्तिया करते समय मुस्लिम को उनके सम्बन्धित बोर्ड-निगम तक ही महदूद क्यों रखती है। जबकि मुस्लिम समुदाय के नेताओं व कार्यकर्ताओं का मनोनयन भी मेन स्टीम वाले बोर्ड-निगम व संवेदानिक पदों पर भी मनोनयन होना चाहिए। इसके साथ ही जिला परिषद व पंचायत समिति निदेशक एवं प्रधान व जिला प्रमुख की टिकट देने मे मुस्लिम समुदाय के लिये बरती जा रही कंजूसी के बजाय उनको उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग कर डाली।

    शरीफ ने कांग्रेस संगठन मे प्रतिनिधित्व पर बोलते हुये मांग कर डाली की प्रदेश कांग्रेस कमेटी से लेकर ब्लॉक स्तर तक मुस्लिम समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए ताकी समुदाय को लगे की उनको भी भागीदार माना जा रहा है। उन्होंने सत्ता व संगठन मे मुस्लिम समुदाय को प्रयाप्त हिस्सेदारी देनी तक की वकालत तक कर डाली। सितंबर माह की शूरुआत मे तृतीय भाषा के अध्यापक पद को समाप्त करने के लिये जारी आदेश के मुद्दे को शरीफ ने माकश के सामने उठाकर उस आदेश से कांग्रेस को नुकसान होने की सम्भावना की तरफ इशारा किया तो गोविन्द डोटासरा तूरंत उस पर सफाई देते नजर आये।

    कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस के खूले मंच पर सीनियर नेताओं के सामने खूलकर मुस्लिम नेताओं द्वारा समुदाय के हक व राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग रखने का सिलसिला कांग्रेस पार्टी मे कतई नही रहा है। लेकिन हिम्मत करके जिस तरह से शरीफ ने कांग्रेस नेताओं के सामने अपनी जायज मांग रखी है। उन मांगो के वीडियो का सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने से कांग्रेस मे हड़कंप मचा हुवा है कि उक्त तरह से मुस्लिम नेता पार्टी मंच पर बात रखने लगे तो परिपाटी मे बदलाव आ सकता है। देखते है कि उक्त आवाज उठाने के बाद कांग्रेस राजनीति मे शरीफ को किनारे लगाया जाता है।

  • PM किसान सम्मान निधि योजना में घोटाला,18 लोगों को किया गया अरेस्ट

    मुजफ्फर आलम। मिल्लत टाइम्स
    नई दिल्ली: केंद्र सरकार के किसान सम्मान निधि योजना में एक बड़ा घोटाल सामने आया है. सरकार के इस स्कीम का लाभ कुछ ऐसे लोग भी ले रहे थे जो इसके योग्य नहीं थे. तमिलनाडु सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना में 110 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े घोटाले का खुलासा किया है.

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि धोखाधड़ी करके 110 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान ऑनलाइन निकाल लिया गया. वहीं इस मामले में अबतक 18 लोगों को अरेस्ट किया गया है.

    ऐसे हुआ खुलासा

    दरअसल कल्लाकुरिची, विल्लुपुरम, कुड्डलोर, तिरुवन्नमलाई, वेल्लोर, रानीपेट, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णगिरि और चेंगलपेट जिले से अगस्त में असामान्य रुप से कई लाभार्थी बढ़ गए. प्रमुख सचिव गगनदीप सिंह बेदी ने बताया कि ऐसे 18 लोगों को, जो एजेंट या दलाल थे, गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि एग्रीकल्चर स्कीम से जुड़े 80 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और 34 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. अवैध रुप से कई लोगों को जोड़ा गया था. मॉडस ऑपरेंडी में सरकारी अधिकारी शामिल थे, जो नए लाभार्थियों में जुड़ने वाले दलालों को लॉगिन और पासवर्ड प्रदान करते थे और उन्हें 2000 रुपये देते थे. वहीं इस बारे में
    तमिलनाडु सरकार का दावा है कि 32 करोड़ रुपये वसूल कर लिए गए हैं और बाकी पैसे अगले 40 दिनों के भीतर वापस आ जाएंगे.

  • लाईफ इन्श्योरेंस पॉलिसी के नाम पर करोड़ो की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

    राजसमन्द के व्यक्ति से 85 लाख व भीलवाड़ा के व्यक्ति से ठगे करीब 1 करोड़

    अशफाक कायमखानी।

    राजसमन्द 07 सितम्बर। इन्श्योरेंस पॉलिसी कराने व एजेंट बन लोगों की पॉलिसी करने पर मोटा कमीशन व अन्य लुभावने ऑफर देकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले मास्टर माइण्ड समेत गिरोह के 6 ठगों को थाना राजनगर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। जिनसे इस तरह की धोखाधडी और कितने लोगो के साथ की गई,के बारे मे पुछताछ जारी है।
    एसपी राजसमन्द भुवन भूषण यादव ने बताया कि गिरफ्तार मोहम्मद जावेद पुत्र मोहम्मद मुबीन (31), रवि कुमार पुत्र मुन्ना शाह (32), राहुल गर्ग पुत्र निरंजन प्रसाद (33), गौरव बंसल पुत्र राम प्रताप (31), संजय चौधरी पुत्र केहर सिंह चौधरी (31) तथा सोनू बघेल पुत्र भगवान सिंह, दिल्ली के विभिन्न इलाकों के रहने वाले है। गिरोह का मास्टर माईण्ड जावेद है जो अपने साथियो के साथ मिलकर फर्जी सिम कार्ड से अलग-अलग व्यक्ति बनकर लोगो का कॉल करते है। उन्हे विभिन्न पॉलिसियो के लुभावने प्रलोभन देकर उनसे अलग- अलग बैक खातो में पैसे ट्रान्सफर करवा लेते है। सोनू खाता अरेन्ज करता था, जिसका उसे 7 प्रतिशन कमीशन मिलता था। ठगी की रकम पांचों के बैंक खातों में होती हुई अंत मे जावेद के पास जाती। जावेद सबका कमीशन सोनू के मार्फत देता।

    एसपी यादव ने बताया कि 31 अगस्त को थाना राजनगर निवासी नरेन्द्र प्रकाश जैन ने उनके सम्मुख एक रिपोर्ट पेश की जिसके अनुसार इन्श्योरेंस पॉलिसी कराने व एजेंट बन लोगों की पॉलिसी करने पर विभिन्न प्रकार के लुभावने ऑफर देकर उससे 2017 से अब तक 85 लाख रूपये की ठगी की गई है। इस पर थाना राजनगर पर मुकदमा दर्ज कर एएसपी राजेश गुप्ता के निर्देशन, सीओ गोपाल सिह भाटी के सुपरविजन में प्रशिक्षु आरपीएस नोपा राम व थानाधिकारी प्रवीण टांक के नेतृत्व में टीमे गठित कर टीमे दिल्ली रवाना की गई। गठित टीम छहों ठगों को दिल्ली से डिटेन कर राजनगर थाने लेकर आई। प्रारम्भिक पूछताछ में राजनगर के केस के अलावा भीलवाड़ा निवासी मोहन लाल पाटीदार के साथ करीब 1 करोड रूपये की धोखाधडी की जानकारी मिली है जिसका प्रकरण साईबर थाना जयपुर में भी दर्ज है।

  • पानीपत:इखलाक सलमानी के साथ जुल्म की इंतिहा,हाथ काट मृत समझकर फेंका रेलवे ट्रैक पर

    मिल्लत टाइम्स, पानीपत:हरियाणामें जंगल राज की एक होर घटना सामने आई
    कस्बा ननौता जिला सहारनपुर के निवासी इखलाक सलमानी s/o फकीरा रोजगार की तलाश में पानीपत आया और पार्क में बैठा हुआ था पार्क में दो आदमी आए जिन्होंने नशा किया हुआ था और उससे मारपीट करने लगे और वहां से जाकर 6,7 तो लोगों को बुला कर लाए और उनमें एक औरत भी थी और इखलाक सलमानी को पकड़ कर एक घर डैयरी के अंदर ले गए जहां पर मौजूद कुछ औरतें और आदमियों ने उसके साथ बहुत ज्यादा मारपीट की और उसका एक हाथ काट दिया और मरा हुआ समझकर रेलवे लाइनों के पास फेंक दिया । इखलाक सलमानी को होश आया तो उसने किसी राहगीर से एक नंबर मिलाने के लिए कहा और उसने अपने फोन से उसके घरवालों को ननौता फोन किया और बता कि आपका लड़का यहां पर जख्मी हालत में पड़ा हुआ है और इस का एक हाथ भी कटा हुआ है । पीड़ित के भाई इकराम सलमानी s/o फकीरा ने अपने किसी परिचित को फोन कर के घायल अवस्था में पडे अपने भाई के पास भेजा और परिचित ने पुलिस की मदद से रोहतक हस्पताल पहुंचाया । उसके बाद इकराम सलमानी रोहतक अस्पताल पहुंचा और अपने भाई को देखा और उसने देखा कि उसके भाई के पूरे शरीर में बहुत ज्यादा पीटने से चोटें लगीं हुईं हैं यह घटना चौंकी किसनपुरा पानीपत की है और अभी तक गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है और अभी तक पुलिस ने पीड़ित इखलाक के बयान लिए ओ ना ही एफ आई आर दर्ज की क्या सुशांत सिंह राजपूत ही भारत का वासी था उसी को इन्साफ के सरकार और मीडिया मुहिम चला सकता है। मैं इकराम सलमानी और मेरा भाई पीड़ित इखलाक जिस को मरा हुआ समझ कर फेंक दिया और कोहनी से एक हाथ काट सारी जिंदगी के लिए अपाहिज बना दिया को भी इनसाफ चाहिए हमारी मान्ननय प्रधानमंत्री, ग्रह मंत्री, डीजीपी हरियाणा, पुलिस कमिश्नर पानीपत और इंचार्ज चौकी किशनपुरा पानीपत और सभी देशवासियों से भी अपील है कि हमें इंसाफ दिलाया जाए और गुनाहगारों को जेल भेजा जाए और उनके खिलाफ इरादतन कत्ल और हाथ काटने और मारपीट करने की जो भी धारा हेल्प बनती हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए इकराम सलमानी सदर नानौता ऑल इंडिया जमात ए सलमानी बिरादरी

  • पटना में 21 सितंबर से स्कूल खोलने का आदेश, डीएम ने किया एलान

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    पटना। के डीएम कुमार रवि ने 21 सितंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एसओपी का ख्याल रखते हुए कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए शिक्षण संस्थान को खोलने का परमिशन दे दिया है. पटना जिलाधिकारी कुमार रवि ने अनलॉक-4 को लेकर सभी अनुमंडल पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी, सभी थानाध्यक्ष सहित प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी को को प्रभावी कार्यान्वयन का निर्देश दिया है.

    गृह विभाग की ओर से जारी आर्डर के मुताबिक डीएम कुमार रवि ने अनलॉक-4 के तहत कंटेनमेंट जोन के बाहर सभी गतिविधियों की अनुमति प्रदान करते हुए मात्र निम्न गतिविधियों पर रोक लगाई है. शिक्षण संस्थानों में 50% तक शिक्षण और गैर शिक्षण कर्मचारियों को ऑनलाइन कक्षा/ टेली काउंसलिंग और संबंधित कार्यों के लिए 21 सितंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया के आलोक में शिक्षण संस्थान में आने की अनुमति रहेगी. 9 वीं से 12 वीं तक के छात्र, पढ़ाई के सिलसिले में शिक्षकों से स्कूल में मुलाकात कर सकते हैं, पर इसके लिए अभिभावक की इजाजत जरूरी होगी.

    गृह मंत्रालय की ओर से कोविड-19 के प्रसार को रोकने हेतु कंटेनमेंट जोन में लॉक डाउन की अवधि को 30 सितंबर तक विस्तारित करते हुए कंटेनमेंट जोन के बाहर अनलॉक 4 के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश 29 अगस्त को ही दिए गए हैं. इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार सरकार द्वारा गृह मंत्रालय के उपयुक्त आदेश को यथावत लागू एवं अनुपालित किए जाने के संबंध में 7 सितंबर को निर्देश निर्गत किए गए हैं. तदनुसार जिलाधिकारी पटना द्वारा इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. अब दुकानों के खोलने की समयावधि के संदर्भ में स्थानीय स्तर पर लागू लॉकडाउन संबंधी आदेश अब प्रभावी नहीं हैं. दुकानों को खोलने एवं बंद करने संबंधी कार्य दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम एवं सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत किए जाएंगे.

    पटना डीएम के मुताबिक स्कूल, कॉलेज ,शैक्षणिक संस्थान, कोचिंग संस्थान सभी छात्रों के लिए 30 सितंबर तक बंद रहेंगे. लेकिन निम्न गतिविधियां परिचालित हो सकेंगी –

    1. ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा को जारी रखते हुए इसके बढ़ावा देने की अनुमति दी गई है.

    2. शिक्षण संस्थानों में 50% तक शिक्षण/ गैर शिक्षण कर्मचारियों को ऑनलाइन कक्षा/ टेली काउंसलिंग और संबंधित कार्यों के लिए 21 सितंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया के आलोक में शिक्षण संस्थान में आने की अनुमति रहेगी.

    3. कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को कंटेनमेंट जोन के बाहर अवस्थित विद्यालयों में स्वैच्छिक आधार पर शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त करने हेतु 21 सितंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया के आलोक में शिक्षण संस्थान में आने की अनुमति रहेगी.

    4. राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों/ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कौशल या उद्यमिता प्रशिक्षण में कौशल या औद्योगिक प्रशिक्षण हेतु 21 सितंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया के आलोक में संचालन की अनुमति रहेगी.

    5. सामाजिक/ शैक्षणिक/ मनोरंजन/ सांस्कृतिक/ धार्मिक/ राजनीतिक,/ खेलकूद आदि कार्यक्रम में अधिकतम 100 व्यक्तियों के जमावड़े की अनुमति मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का अनुपालन थर्मल स्कैनिंग हैंडवॉश सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था के साथ 21 सितंबर से रहेगी. लेकिन विवाह समारोह के लिए अधिकतम 50 व्यक्तियों तथा दाह संस्कार में अधिकतम 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति 20 सितंबर तक रहेगी. 21 सितंबर से अधिकतम 100 व्यक्तियों के शामिल होने की अनुमति रहेगी.

    6. सिनेमाघर, स्विमिंग पुल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर एवं इस तरह के सभी स्थल बंद रहेंगे. लेकिन ओपन थिएटर को 21 सितंबर से संचालित करने की अनुमति रहेगी.