Category: चुनाव

  • बिहार विधानसभा चुनाव:शिकारी आएगा,जाल बिछाएगा,दाना डालेगा,भूल से फंसना नहीं

    चुनाव में बिहार के मुस्लिम समुदाय के लिए चुनौती

    *शारिब जि़या रहमानी*
    जदयू ने अपनी मुस्लिम फौज चुनावी मैदान में उतार दी है,इस से समझ आता है कि नीतीश कुमार कितने डरे होए हैंI मुस्लिम वोट अगर 100% जदयू से हट गया तो जदयू की सत्ता वापसी नामुमकिन है, बीजेपी से अलग नीतीश कुमार का अपना कोई वोट जनाधार नहीं है, और Covid19 पर विफलता और ग़रीब , मज़दूर के ग़ुस्से से वो परेशान हैं, जिन की घर वापसी का नीतीश ने विरोध किया था और किसी तरह आने के बाद भी सिर्फ़ जुमले बाज़ी होती रही, अब वे वापस जाने को मजबूर हैं, बेरोज़गारी मुद्दा बन जाए इस से वो परेशान हैं, सैलाब से हर साल तबाही आती है, सरकार विफल रहती है, पिछली घोषणाओं पर कोई जवाब नहीं है लकिन लुभावन जुमले बरस रहे हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस,पोस्टरों द्वारा नीतीश को मुसलमानों का मसीहा कहा जारहा है,हरगिज़ उन की जाल में नहीं आना है। वो तरह तरह से जुमले छोड़ेंगे, अगर इस बार इस पार्टी को वोट दे दिया तो CAA पर आप का आंदोलन, आप की जागरुकता की विशाल मुहिम बर्बाद होगी और वो समझेंगे कि मुसलमानों के साथ कुछ भी करो, वोट तो दे ही देंगे, इस बार इस रिवायत को बदलना हैI ऊर्दू को अनिवार्य विषय से हटा कर नीतीश कुमार ने उर्दू बल्कि अपने मुस्लिम विरोधी होने पर मुहर लगाई है,बार बार इस विषय पर ध्यान दिलाया जा रहा है, शिक्षा मंत्री को मेमोरेंडम दिए जा रहे हैं लेकिन नीतीश और उन के मुस्लिम चमचों पर कोई असर नहीं है, उर्दू अनुवादक और सहायक अनुवादक की परीक्षा टाल दी गई, यानी इस की घोषणा सिर्फ़ वोट लेने और चुनावी धोखे बाज़ी के लिए थी तभी तो बिहार स्टाफ़ सिलेक्शन कमिशन की वेबसाइट पर सारी चीजें अपलोड हो रही हैं लकिन अनुवादक परीक्षा पर चुप्पी हैI याद रहे जो भी जदयू का मुस्लिम चेहरा आप के पास आए या सोशल मीडिया पर गुण गान करे उससे CAA पर वोटिंग पर सवाल करें,जदयू की वजह से यह बिल Act बना हैI वे आपको बताएँगे कि बिहार सरकार ने NRC और NPR पर प्रस्ताव पारित कर दिया है कि बिहार में 2010 का NPR होगाI

    याद रहे कि यह धोका है,NPR 2010 वाला हो या 2020 वाला, दोनों नागरिकता Act से जुड़े हैंI जिस के साथ NRC भी है यानी जब NPR होगा तो NRC भी होगी,जब तक उसे नागरिकता से अलग नहीं किया जाता, CAA के साथ NPR ख़तरनाक है, क्यूँ कि धर्म के नाम पर नागरिकता मिलोगी और नागरिकता धूमिल की जाएगी जो संविधान के सिद्धांत, लोकतंत्र, एकता और बराबरी के ख़िलाफ़ है और जदयू ने इसे पास कराया है।

    एक और बात कि NRC लागू करने से बिहार सरकार कैसे मना कर सकती है? जदयू के मुस्लिम नेताओं के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि NRC लागू ना करना स्टेट का संविधानिक अधिकार ही नहीं है यानी जिस का अधिकार नहीं उस पर प्रस्ताव पारित हो रहा है और जहाँ वोट ना देने का अधिकार था वहाँ (पार्लियामेंट में) जदयू बिल पारित करवाती है, मुसलमान को इतना बेवकूफ़ ना बनाएं, मुसलमानों ने बदला लेने का मन बना लिया है, मुस्लिम वोट लेकर बीजेपी की गोद में बैठ कर जो धोका नीतीश कुमार ने दिया है वो भी याद है, बिहार में जगह जगह मुस्लिमों को निशाना बनाया गया, मुस्लिम असुरक्षित हैं, नीतीश राज में माब लिंचींग बढ़ी, फुलकारी, औरंगाबाद, सीतामढ़ी सब याद हैं, इनका जवाब जदयू के मुस्लिम बहादुर नहीं दे सकते हैं लकिन सब का हिसाब मुस्लिम, वोट से लेंगे, उन्हें सब याद हैIजदयू के प्रचारकों से जवाब लेना होगा।

    नीतीश कुमार की मुस्लिम और उर्दू विरोधी नीति से उनकी अस्ल छवि सामने आगई है,इस बार हर सीट पर जदयू के प्रत्याशी को हराने की नीति अपनानी होगी और महागठबंधन को उन्हीं जगह मजबूरी में वोट करना है जहां मजलिस का मज़बूत प्रत्याशी ना हो, तेजस्वी की मानसिकता को देखते हुए मजलिस का मैदान में होना अनिवार्य है लकिन मजलिस को भी 10/12 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारना चाहिए,और बहुत मज़बूत लड़ाई चिन्हित सीटों पर होनी चाहिएI ताकि ज़्यादा सीटों पर मुस्लिम वोट के बट जाने से एनडीए को फ़ायदा भी ना हो और मुस्लिम नुमाइंदगी भी हो जाए।

    किसी भी तरह जाल में नहीं आना हैI वोट देते समय दिल पर हाथ रख कर महसूस कीजिए गा कि जिस दिन आप के वोट को लात मारकर नीतीश बीजेपी के साथ गए थे तो आप को कैसा लगा था? जब जदयू पार्लियामेंट में CAA पर वोट दे रही थी तो ख़ुद को आप कैसा ठगा महसूस कर रहे थे? तीन तलाक़ बिल पर पार्लियामेंट से भाग कर बिल को वो पारित कराने में मदद कर रही थी तो आप का दिल किया कह रहा था?

    हाँ आरजेडी गठबंधन से भी सवाल करते रहना है कि मुस्लिम ईशू पर पार्टी की किया पॉलिसी है? कितनी नुमाइंदगी दे रहे हो?आरजेडी में मुस्लिम लीडरशिप पनपने क्यूँ नहीं दी जाती है? वोट लेने के लिए मुस्लिम और विकास और मंत्रालय के लिए यादव? यादव ने लोकसभा चुनाव में आरजेडी को वोट नहीं दिया है, तेजस्वी इस पर चुप क्यूँ हैं? मुस्लिम इशू से उन्हें दिलचस्पी क्यूँ नहीं है? क्या मुस्लिम को वोट की मशीन और मजबूर समझ लिया है? इसलिए 10/12 मजलिस के मज़बूत उम्मीदवारों को वोट देकर आरजेडी का ग़ुरूर भी तोड़ना ज़रूरी है।

    मजलिस से भी सवाल है कि तेलंगाना में 7/8 और महाराष्ट्र,उप, बिहार में पार्टी विस्तार क्यूँ? तेलंगाना की तरह बिहार में भी 7/8 पर प्रत्याशी क्यूँ नहीं उतारते? KCR की पार्टी और उस की पॉलिसी, कॉग्रेस, आरजेडी,एसपी, एनसीपी से अलग कैसे है? जो नरसिम्हा रॉ के प्रेम में गिरफ़्तार है, KCR के कमयूनल एजेंडे पर चुप्पी रहती है लकिन सारी बहादुरी और ईमानी गर्मी तेलंगाना से बाहर निकलने लगती है? KCR को कमयूनल बोलने की हिम्मत ओवैसी में क्यूँ नहीं है? तेलंगाना में दोस्त के हाथों शहीद मस्जिदों पर भी मजलिस को जवाब देना होगा।
    कहना यह है कि सभी पार्टियों को आईना दिखाना है,यानी वोट देना भी है तो फ़्री में नहीं, जाग कर वोट देंगे, सिर्फ़ वोट की मशीन नहीं बनेंगे, अब तक की हमारी सियासी ग़लती यही है कि हम वोट बैंक बनते रहे, सवाल करना और हिसाब लेना नहीं सीखाI सियासत में सौदेबाज़ी और मोल भाऊ का महत्व है, जो जितना बड़ा डीलर होगा उतना बड़ा नेता समझा जाएगा, सियासत के लिए अब कोई उसूल और सिद्धांत नहीं है,आज की सियासत बेऊसुली का नाम हैI किसी भी पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है और ना अब कोई सिकूलर है। मुस्लिम समुदाय को भी यही रास्ता चुन्ना होगा।

  • बिहार चुनाव में ओवैसी की एंट्री, आरजेडी के मुस्लिम-यादव समीकरण में लगा सकते हैं सेंध

    बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हो गया है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी जानकारी दी.

    बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां कमर कस चुकी है. इस चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं. इस क्रम में अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (एसजेडीडी) के बीच गठबंधन तय हो गया है. जिससे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है.
    एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार चुनाव के लिए एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हुआ है. यूडीएसए गठबंधन देवेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा. ऐसी पार्टियां, जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं उनका स्वागत है. वहीं बिहार में यादव और मुस्लिम आरजेडी का वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में एआईएमआईएम और एसजेडीडी के साथ आने से आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है.
    ओवैसी ने कहा कि हमारे बारे में पुराना रिकॉर्ड बताता है कि हम किसी से नहीं डरते हैं. हम चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा में आरजेडी ने कितनी सीट जीती है. किशनगंज में अगर हमारी पार्टी नहीं खड़ी तो कांग्रेस वहां से नहीं जीत पाती. बीजेपी अगर जीत रही है तो उसकी जिम्मेदार आरजेडी है. हैदराबाद में मैंने बीजेपी को हराया, शिवसेना को हराया. महागठबंधन अब नहीं रहा.
    कांग्रेस पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस आज शिवसेना की गोद में बैठी है. कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदा समझती है. कांग्रेस की सोच सामंती है. कांग्रेस की गलत नीतियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

    बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी पहले ही बिहार विधानसभा चुना 2020 लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. सितंबर महीने की शुरुआत में ओवैसी की पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया था. एआईएमआईएम 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुकी है.

  • मुंबई को बदनाम करने वाली कंगना रनौत को बीजेपी का समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण: राउत

    “रनौत को समर्थन देकर और सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपने रुख के जरिए भाजपा राजपूत और क्षत्रिय जैसी अगड़ी जातियों के वोट हासिल कर बिहार चुनाव जीतना चाहती है.”

    मुंबई: Shivsena Leader Sanjay Raut :  शिवसेना नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा मुंबई की तुलना ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर’ (पीओके) से करने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत का समर्थन कर रही है. साथ ही, यह बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.

    शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘‘रोखठोक” में राउत ने यह भी दावा किया मुंबई के महत्व को कम करने का प्रयास पद्धतिबद्ध तरीके से चल रहा है और शहर को सतत बदनाम करना इसी साजिश का हिस्सा है. राउत ने कहा,‘‘यह कठिन वक्त है, जब महाराष्ट्र में सभी मराठी लोगों को एकजुट हो जाना चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि रनौत को समर्थन देकर और सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपने रुख के जरिए भाजपा राजपूत और क्षत्रिय जैसी अगड़ी जातियों के वोट हासिल कर बिहार चुनाव जीतना चाहती है.

    राउत ने कहा, ‘‘ जिस तरह से राज्य का अपमान किया गया, उससे महाराष्ट्र (भाजपा) का एक भी नेता दुखी नहीं हुआ.” उन्होंने कहा,‘‘ एक अभिनेत्री मुख्यमंत्री को अपमानित करती है और क्या राज्य के लोगों को प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए, यह किस तरह की एकतरफा स्वतंत्रता है?”

    उन्होंने कहा,‘‘जब शहर में उनका अवैध निर्माण जिसे वह पाकिस्तान कहती हैं, ध्वस्त किया जाता है, तो वह ध्वस्त ढांचे को राम मंदिर कहती हैं. जब अवैध निर्माण पर सर्जिकल स्ट्राइक हो रहा तो आप मर्माहत हो रहे हैं. यह किस प्रकार का खेल है?

     

  • ‘आपराधिक अवमानना केस में अपील को बड़ी बेंच देखे’, प्रशांत भूषण ने SC दाखिल की रिट याचिका

    इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    Prashant Bhushan Contempt Case: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को एक रिट याचिका दायर की गई. इस याचिका में मांग की गई है कि मूल आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ अपील का अधिकार एक बड़ी और अलग पीठ द्वारा सुना जाए. यह याचिका वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    याचिका में कहा गया है कि यह गलत सजा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगा और वास्तव में बचाव के रूप में सत्य के प्रावधान को सक्षम करेगा.

    बता दें कि 3 अगस्त को प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले पर फैसला सुनाते हुए एक रुपये का जुर्माना लगाया था. फैसले के अनुसार 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में 3 महीने की जेल हो सकती है और तीन साल के लिए उन्हें वकालत से निलंबित भी किया जा सकता है.

    63 वर्षीय प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने यह कहते हुए पीछे हटने या माफी मांगने से इनकार कर दिया कि यह उनकी अंतरात्मा और न्यायालय की अवमानना होगी. उनके वकील ने तर्क दिया है कि अदालत को प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) की अत्यधिक आलोचना झेलनी चाहिए क्योंकि अदालत के “कंधे इस बोझ को उठाने के लिए काफी हैं.

     

  • चिराग पासवान का एक और पत्र जिसका जवाब नीतीश कुमार के पास नहीं |

    चिराग पासवान  के एक पत्र का जवाब नीतीश कुमार  के पास नहीं है. दलितों ने चिराग पासवान के सामने नीतीश कुमार के फैसले पर उठाए सवाल हैं जिसके बाद चिराग ने नीतीश कुमार को पत्र लिखा है. चिराग पासवान ने कहा है कि यदि चुनावी घोषणा नहीं है तो पिछले 15 साल में जितने भी दलितों की हत्याएं हुई हैं उन सभी के परिजनों को सरकार नौकरी दे. गौरतलब है कि बिहार सरकार ने दलित की हत्या होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. आने वाले दिनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं.

    चिराग पासवान ने कहा है कि एससी, एसटी समाज का कहना कि इसके पूर्व तीन डिसमिल जमीन देने का वादा भी सरकार ने पूरा नहीं किया था जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति समाज को निराशा हुई थी. हत्या एक अपराध है और अपराधियों में डर न्याय प्रक्रिया का होना चाहिए ताकि हत्या जैसे जघन्य अपराध से बचें.

    चिराग पासवान ने नीतीश से कहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति ही नही बल्कि किसी वर्ग के किसी भी व्यक्ति की हत्या न हो, इस दिशा में भी कठोर कदम उठाने की जरूरत है. पिछले 15 सालों में जितने भी एससी-एसटी समुदाय के लोगों की हत्या के मामले न्यायालय में लंबित हैं उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाए. इन दोनो मांगों के साथ लोक जनशक्ति पार्टी सहमत है. लोजपा की यह मांग मांगने से सरकार पर सम्पूर्ण बिहारी का विश्वास बढ़ेगा, अन्यथा जनता इसको मात्र चुनावी घोषणा मानेगी.

     

  • जब बिहार विधान पार्षद ने ही उड़ा डाली social distancing की धज्जियां, जमकर मनाया जश्न – देखें वीडियो

    • पूर्वी चंपारण में रोज़ पहुंच रहे हैं सौ के पार आंकड़े
    • फिर भी शहर के प्रथम नागरिक ने की नियमों की अवेहलना
    • जश्न के दौरान नव निर्वाचित एमएलसी अति उत्साह में भूल गए सोशल डिस्टेंसिंग ।
    • ज्यादातर नेताओं ने मास्क पहनने से भी किए परहेज
    • स्वागत कार्यक्रम में नेताओं ने जमकर उड़ाई Social Distancing की धज्जियां
    • डीएम शीर्षत कपिल अशोक करेंगे करवाई ?? 

     

    पटना  / मिल्लत टाइम्स डेस्क

    भले ही बिहार में कोरोना संक्रमितों का आकड़ा रोज़ हजार के पास पहुंच  रहा हो लेकिन बावजूद इसके आम जनता तो आम जनता, जिममेदार पदों पर बैठे लोग भी कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों की अनदेखी करने में पीछे नहीं है। सोमवार को ऐसा ही वाकिया सामने आया है, जिसमें क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक  यानी नव निर्वाचित एमएलसी फारूक शेख ने कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई। दरअसल विधान परिषद सदस्य बनाए जाने के बाद पहली बार पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा का दौरा करने आए थे जहां उनके कार्यकर्ता  उनका फूल माला से स्वागत करने के लिए पहुंचे थे। वो पटना से चल कर ढाका पहुंच रहे थे जिसके मद्दे नज़र उनके कार्यकर्ताओं ने उन्हें पूर्वी चंपारण जिला अंतर्गत चकिया में रिसीव किया जिसमें सैकड़ों बाइक तथा चारपहिया वाहन शामिल थे । हजारों की इस भीड़ से गद गद एमएलसी फारूक शेख मास्क लगाना भूल गए।  जबकि उनका अभिनंदन करते हुए कई नेताओं ने ना सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग की  अनदेखी की, बल्कि धज्जियां भी उड़ाई । हालांकि अभी भी पूरे राज्य में लॉक डाउन जारी है जिसमें किसी भी राजनैतिक , सामाजिक अर्थात सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक है ।

     

    वहीं दूसरी तरफ आम लोगों से वाहन अधिनियम का पालन कराने वाली आम लोगों को वाहन अधिनियम का पाठ पढ़ा कर हजारों का जुर्माना ऐंठने वाली बिहार पुलिस के सामने वाहन अधिनियम की भी खूब धज्जियां उड़ाई गई । और पुलिस सिर्फ तमाशाई बनी रही। 
    अब ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि क्या सिर्फ आम लोगों के लिए लॉक डाउन है और कुर्सी पर बिराजमान राजनैतिक हस्तियों के लिए कुछ भी नहीं ??
     क्या पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक इस पर कार्रवाई करेंगे ?? क्या
    ज्ञात हो कि : इस से पूर्व जिले के ढाका विधायक फैसल रहमान कोरेंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूरों के साथ हो रही कू-व्यवस्था को लेकर ढाका गांधी चौक पर धरने पर बैठे थे । जिसके बाद पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक के आदेश पर ढाका अनुमंडल पदाधिकारी ज्ञान प्रकाश ने उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी ।
    प्रशासन ने ये आरोप लगाया था कि सामाजिक दूरी का पालन न करने , बिना परमीशन धरना पर बैठने तथा लॉक डाउन के नियमों का उलंघन करने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है ।

  • झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: 5 चरणों में होगा चुनाव, 23 दिसंबर को होगी नतीजे

    झारखंड (Jharkhand)  में विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election) का बिगुल बज गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा (Sunil Arora ) ने चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. झारखंड में पहले चरण का मतदान 30 नवंबर, दूसरे चरण का मतदान 7 दिसंबर, तीसरे चरण का मतदान 12 दिसंबर, चौथे चरण का मतदान 16 दिसंबर और पांचवें चरण का मतदान 20 दिसंबर को होगा. चुनावों के नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे. चुनाव आयोग (Election commission) ने कहा है कि उन्होंने व्यापक तैयारी की है और झारखंड में आज से आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी गई है.

    बता दें कि, झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2020 को पूरा हो रहा है, उससे पहले नई सरकार का गठन किया जाएगा. पिछली बार झारखंड में पांच चरणों में चुनाव हुए थे. 81 सदस्यों की विधानसभा में बीजेपी आजसू गठबंधन ने 42 सीटें जीती थीं. बीजेपी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 37 सीटें जीती थीं. जबकि उसके सहयोगी आजसू ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था और पांच सीटें जीती थीं.

    झारखंड में पिछली बार कई बड़े नेता चुनाव हार गए थे. इसमें सीएम उम्मीदवार अर्जुन मुंडा, तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम मधु कोड़ा, आजसू अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो शामिल थे. चुनाव बाद झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के छह विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे.input:(ndtv)

  • शिवसेना सांसद संजय राउत बोले – पहले भी मुकर चुकी है BJP

    महाराष्ट्र में भाजपा पर दबाव बनाते हुए शिवसेना ने 50-50 के फॉर्मूले की मांग कर रही है. भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया है, लेकिन अभी तक सरकार बनाने को लेकर कोई बात नहीं हुई है. सोमवार को शिवसेना और भाजपा दोनों पार्टियों को प्रतिनिधिमंडलों ने राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात की है. एनडीटीवी से बात करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ‘वे(भाजपा) अपने वादे से नहीं मुकर सकते.’ बता दें, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की. यह मुलाकात राज्य में गठबंधन सहयोगियों भाजपा-शिवसेना के बीच सत्ता को लेकर जारी झगड़े के बीच हुई है. राज भवन के एक अधिकारी ने बताया कि यह ‘औपचारिक मुलाकात थी.’  वहीं, दूसरी ओर शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात की है.

    महाराष्ट्र में 50-50 के फॉर्मूले पर कहा, ‘यह उनका(भाजपा) हमारे साथ समझौता है. इसको समझाना चाहिए. उन्होंने मीडिया के सामने यह बात कही थी. वे अपनी बात से नहीं मुकर सकती.’

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों पर बोले ओवैसी, हर बार मोदी के नाम पर नहीं जीत सकती बीजेपी..

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है और ध्रुवीकरण की राजनीति बंद करने को कहा है. ओवैसी ने कहा, ‘बीजेपी महाराष्ट्र में क्लीन स्वीप का दावा कर रही थी, लेकिन रिजल्ट वैसा नहीं रहा है जैसा वे चाहते थे. चुनाव परिणाम बीजेपी को आगाह करने वाले हैं. उन्हें ध्रुवीकरण की राजनीति बंद कर देनी चाहिए और अर्थव्यस्था और ग्रामीण क्षेत्रों के संकट पर ध्यान देना चाहिए.’ आपको बता दें कि ओवैसी की पार्टी पहली बार बिहार में खाता खोलने में सफल रही है. उप चुनावों में पार्टी के प्रत्याशी कमरुल होदा (Kamrul Hoda) ने किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की स्वीटी सिंह को हरा दिया. वहीं, महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने 2 सीटों पर जीत हासिल की है.

    बिहार में पार्टी उम्मीदवार की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा, ‘बिहार में हमारी पहली जीत बहुत महत्वपूर्ण है. हमने न सिर्फ बीजेपी को पराजित किया, बल्कि कांग्रेस को भी तीसरे स्थान पर धकेला. मैं इसके लिए किशनगंज की आवाम का धन्यवाद करना चाहता हूं.’ गौरतलब है कि बिहार विधानसभा उपचुनाव (Bihar Assembly By-Polls Election Results 2019) में किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कमरुल होदा (Kamrul Hoda) ने भारतीय जनता पार्टी की स्वीटी सिंह को 10,211 मतों के अंतर से हरा दिया है. AIMIM के कमरुल होदा को 70469 वोट मिले हैं, जबकि दूसरे नंबर पर बीजेपी की स्वीटी सिंह को 60,258 मत मिले. वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस की सईदा बानो रही हैं. यह पहली बार है जब बिहार में AIMIM ने खाता खोला है.. input (ndtv)

  • हरियाणा में किसी भी दल को बहुमत नहीं,महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत

    नई दिल्ली. दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है।गठबंधन को 161सीटें मिली हैं। हरियाणा में भाजपा 40 और कांग्रेस 31 सीटों पर जीती। भाजपा निर्दलियों के दम पर सरकार बनाने का दावा कर रही है। जीतने वाले 7 निर्दलियों में 5 भाजपा के बागी हैं और पार्टी का दावा है कि ये वापस लौटेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और इस दौरान उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र की जनता को धन्यवाद दिया। मोदी ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्रियों की टीम की ईमानदारी पर जनता ने भरोसा जताया।]

    हरियाणा में भाजपा की सत्ता में वापसी का समीकरण
    90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 46 है। भाजपा 40 सीटों के आंकड़े पर है। पार्टी ने निर्दलियों के दम पर सत्ता बनाने का दावा किया है। 7 निर्दलियों में से 5 भाजपा के बागी हैं और पार्टी का दावा है कि ये सभी वापस आ रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस बीच, भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल दो विधायकों को लेकर दिल्ली रवाना हुईं। इनमें गोपाल कांडा के अलावा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल के बेटे रणवीर सिंह भी शामिल हैं। रणवीर कांग्रेस में थे, टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की।

    मोदी ने कहा- दिवाली से पहले जनता को बधाई
    दिल्ली मुख्यालय में मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा- दिवाली का आरंभ होने से पूर्व ही मैं महाराष्ट्र और हरियाण की जनता का धन्यवाद करता हूं, क्योंकि उन्होंने भाजपा के प्रति विश्वास जताया और आशीर्वाद दिए।

    शाह ने कहा- महाराष्ट्र में भाजपा-सेना गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहा है। हरियाणा में हम सबसे बड़ा दल बनकर उभरे। हरियाणा और महाराष्ट्र में कभी हम मुख्यमंत्री नहीं बना पाए थे। 2014 में देश की जनता ने परिवर्तन किया। मोदीजी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत देकर चुनाव जिताया। दोनों जगह भाजपा की सरकार बनी। 5 महीने के भीतर मोदी-2 सरकार ने जिस स्पीड और सटीकता से काम किया, जनता ने उस पर मुहर लगाई।
    हरियाणा में पहली बार लड़ी जजपा को 10 सीटें मिलीं
    अभय चौटाला की इनेलो से अलग होकर उनके भतीजे दुष्यंत चौटाला ने 10 महीने पहले जननायक जनता पार्टी (जजपा) बनाई। इस विधानसभा चुनाव में उसे 10 सीटें मिली हैं। हालांकि, चौटाला परिवार के 5 सदस्य अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़े और इनमें से 4 को जीत मिली।

    महाराष्ट्र में एम आई एम ने 44 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा किया था जहां एम आई एम को 2 सीटों पर कामयाबी मिली वहीं बिहार के किशनगंज से एम आई एम ने जीत का परचम लहराया

    महाराष्ट्र में शिवसेना की मांग सत्ता में 50-50 भागीदारी
    शिवसेना ने गठबंधन सरकार में बराबर की भागीदारी मांगी है। पार्टी के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि गठबंधन के लिए 50-50 का फॉर्मूला तय हुआ था और हम इससे पीछे नहीं हटेंगे। यह मैं अपने मन से नहीं कह रहा हूं। लोकसभा चुनाव से पहले ही भाजपा के साथ इस पर सहमति बनी थी।

    राष्ट्रवाद, धारा 370 की बात करने वाली भाजपा का वोट शेयर घटा
    महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने धारा 370 खत्म करने, तीन तलाक और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे उठाए। उधर, यहां कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने बेरोजगारी, किसान, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था पर मौजूदा भाजपा सरकारों को घेरा। हरियाणा में 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 58% वोट हासिल हुए थे, जबकि 5 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत 36% हो गया यानी 22% का नुकसान। उधर, महाराष्ट्र में 2014 विधानसभा में गठबंधन के दलों को 47.6% वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव में 51% वोट मिले। इस विधानसभा चुनाव में वोट शेयर घटकर 42% रह गया यानी लोकसभा चुनाव से करीब 9% कम।