Category: देश

  • नेपाल पुलिस ने दिखायी पाकिस्तान जैसी बर्बरता,भारतीय लगन राय को बूट से रौंद,घंटो तक पीटते रहे

    शहनवाज हुसैन, बिहार: बर्बरता के मामले में अब तक भारत के दुश्मन नंबर एक पाकिस्तान की सेना और वहां की सरकार के किस्से आम रहे हैं लेकिन नेपाल की पुलिस ने बर्बरता की जो नई दास्तान लिखी है वह रूह कंपा देने वाली है। सीतामढ़ी से सटे नेपाल सीमा पर हुए विवाद के बाद नेपाली पुलिस जिस भारतीय को अपने साथ ले गई थी उसे घंटों प्रताड़ित करने के बाद आखिरकार छोड़ दिया। लेकिन नेपाली पुलिस की हिरासत में भारतीय लगन राय के साथ जो कुछ हुआ वह बर्बरता की इंतहा को बयां कर रहा है।

    नेपाल की पुलिस के गिरफ्त से छूटकर आए लगन राय में आपबीती सुनाई है। लगन राय ने कहा है कि नेपाल की पुलिस उन्हें संग्रामपुर से उठाकर ले गई थी। उन्हें राइफल की बट और जूतों से बुरी तरह रौंदा गया। नेपाली पुलिस को इसलिए पीट रही थी कि वह यह बयान दे दे कि सैकड़ों भारतीयों ने नेपाल की पुलिस पर हमला किया। लगन राय कहते हैं कि अब तक नेपाल को लेकर उनके मन में ऐसा नहीं था लेकिन जिस तरह उन्हें घंटों बूट और बेल्ट से पीटा गया वह कभी भूल नहीं सकते। सैकड़ों की तादाद में जवानों ने उन्हें घेर रखा था और लगातार उनकी पिटाई की गई। शरीर के हर हिस्से पर जख्म के निशान बता रहे हैं कि आखिर नेपाली पुलिस ने उनके साथ किस कदर बर्बरता की। नेपाली पुलिस दबाव बना रही थी कि वह अपने गांव के लोगों के नाम बताएं हालांकि लगन के साथ मारपीट करने वालों में नेपाल के पहाड़ी इलाकों के जवान शामिल थे मधेशी तबके से आने वाले जवानों ने लगन को छुआ तक नहीं।

    भारत नेपाल सीमा पर हुए विवाद के बाद नेपाली पुलिस ने पहले फायरिंग की थी और उसके बाद भारतीय लगन राय को अपने साथ भी ले गए थे। नेपाली पुलिस के हिरासत में रहने के दौरान लगन ने उन लोगों को यह भी बताया है कि उनके बेटे की शादी नेपाल में हुई है और उनकी बहू नेपाली है। लगन की बहु अपनी मां से मिलने के लिए बॉर्डर पर गई थी। उनका बेटा भी साथ था लेकिन नेपाल पुलिस ने उसे रोक लिया। लगन के बेटे को डंडे से पीटा गया और जब वह वहां पहुंचा तो लगन राय उठाकर अपने साथ ले गए। नेपाल पुलिस की तरफ से बॉर्डर पर फायरिंग के दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हो गई। लगन राय को नेपाल पुलिस ने घंटों तक अपने कब्जे में रखा और भारत की तरफ से दबाव बढ़ने के बाद आखिरकार शनिवार की सुबह उसे छोड़ दिया। नेपाल की पुलिस ने जिस तरह का दुस्साहस भारतीय को लेकर दिखाया है वह वाकई हैरत पैदा करने वाला है। नेपाल से सटे भारतीय सीमा खासतौर पर बिहार के इलाकों में रहने वाले लोग इससे नाराज हैं और उनका कहना है कि भारत सरकार को इस पर सख्त रुख अपनाना चाहिए वरना पाकिस्तान की तरह नेपाल भी अब सरदर्द बन जाएगा।

  • क्यों लालू प्रसाद यादव को बिहार में सामाजिक न्याय का मसीहा कहा जाता है?

    Zain Shahab Usmani

    भारतीय राजनीति के बहुचर्चित बिहारी नेता लालू प्रसाद यादव की उम्र 73 साल हो गई है। वो गोपालगंज ज़िले के फुलवरिया गाँव में एक गरीब यादव परिवार में जन्मे थे।

    स्कूलिंग के बाद पटना यूनिवर्सिटी में स्नातक और कानून की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में लालू ने कदम रखा। धीरे-धीरे उनकी सक्रियता बढ़ने लगी। पटना यूनिवर्सिटी के छात्र यूनियन का चुनाव जीतकर प्रेसिडेंट बन चुके लालू ने सक्रिय राजनीति में आने का संकेत दिया।

    जेपी आंदोलन में लालू और निखरे

    जब इंदिरा गाँधी का विरोध शुरू हो चुका था तब लालू यादव जेपी के साथ आंदोलन में शामिल हो चुके थे। फिर जब देशभर में इमरजेंसी लगी तो पूरे देश में नेताओं के साथ लाखों आंदोलनकारियों को भी जेल में बंद कर दिया गया। उन आंदोलनकारियों में लालू भी थे।

    जब इमरजेंसी खत्म हूई तो 1977 के लोकसभा चुनाव में जेपी की अगुआई में जनता पार्टी को जीत मिली। काँग्रेस पहली बार देश की सत्ता से बाहर हो गई। तब लालू प्रसाद यादव 29 वर्ष के युवा सांसद के तौर पर सारन लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे।

    सक्रिय राजनीति में लालू का कद बढ़ता चला‌ गया

    लोकसभा चुनाव जीतने के बाद शुरू हुआ बिहार में लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक सफर। सन् 1980 से सन् 1989 तक 2 बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता के तौर पर ख्याति प्राप्त की।

    बिहार में सत्ता ने करवट ली और साल 1990 में लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। देखते ही देखते सामाजिक न्याय के मसीहा के तौर पर लालू की छवि बन गई। बिहार की सत्ता में पिछड़ों का प्रतिनिधित्व बढ़ते ही पूर्ण रूप से बदलाव आ चुका था।

    कभी बिहार की जो राजनीति सवर्णों के इर्द-गिर्द घूमती थी, वह अब नए रूप में पिछड़ों और वंचितों के इर्द-गिर्द घूमने लगी। उसी सामाजिक न्याय के आन्दोलन का ही नतीजा है कि आज नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। एक समय ऐसा भी आया कि जीतन राम मांझी भी बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस बदलाव के बाद बिहार में कई नेता उभरे।

    बिहार की राजनीति का वह 15 साल

    लालू प्रसाद यादव यादव सन् 1990 से लेकर 2005 तक अकेले अपने दम पर बिहार की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहे। जिसका मुख्य कारण मुस्लिम-यादव गठजोड़ है।

    जिसके तहत ठोस जनाधार और अन्य पिछड़ी जातियों के सहयोग से अपनी चुनावी रणनीति बनाए रखने में लालू कामयाब होते रहे।

    आज भी है लालू के पास मज़बूत जनाधार

    आज भी लालू प्रसाद यादव के पास एक मज़बूत जनाधार है, जो बिहार के अंदर किसी दल या नेता के पास नहीं है। इसका उदाहरण 2004 के लोकसभा चुनाव के नतीजों में दिखाई दिया है।

    फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में जब-जब लालू यादव कमज़ोर हुए और खुद को किंग मेकर के रूप में दर्शाया, तो यह साबित हो गया कि लालू यादव के पास मज़बूत जनाधार था और है।

    बात कहने का लालू का अपना खास अंदाज़

    अपनी बात कहने का लालू यादव का खास अंदाज़ है। रेलवे में कुल्हड़ की शुरुआत करने से लेकर चरवाहा स्कूल खोलने और दलितों की बस्तियों में जाकर बच्चों को अपने हाथों से नहलाने का लालू यादव का अंदाज़ हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। अपने विरोधियों पर भी वो अलग ही तेवर में हमला करते रहे हैं।

    लालू ने अपने खास अंदाज़ के ज़रिये किसी को भी नहीं छोड़ा। वो मोदी, अमित शाह या फिर भाजपा सभी पर हमलावर दिखाई देते हैं। शायद ही देशभर में कोई भाजपा के विरोध में लालू प्रसाद यादव के बराबर आक्रमक हो।

    अब तक देशभर में लालू यादव की छवि एक मज़बूत सेक्युलर और भाजपा विरोधी नेता की रही है। लालू प्रसाद यादव को उनकी इसी छवि ने बिहार में सामाजिक न्याय का मसीहा बना दिया।

  • गिरफ्तार छात्रों,कार्यकर्ताओं,बुद्धिजीवियों के समर्थन में एस.डी.पी.आई ने राज्य स्तर पर विरोध जताया और कहा अवैध गिरफ्तारियों पर बढ़ रहा है सार्वजनिक आक्रोश

    प्रेस विज्ञप्ति 07 जून 2020
    आज भारत एक पूर्ण पुलिस राज्य में बदल रहा है और ऐसे समय में जब दुनिया के देश भी युद्ध को रोक रहे थे, पुलिस राज्य और अत्याचारी सरकार ने लोगों के खिलाफ कोरोना महामारी से लड़ने के लिए युद्ध शुरू कर दिया। झूठे आरोप लगाकर और गंभीर प्रावधान लगाकर छात्र छात्राओं, कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों को कैद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जो अभी भी जारी है।यह बात एसडीपीआई बिहार के दरभंगा जिला सचिव मोहम्मद इरशाद ने कही। उन्होंने आगे कहा कि अब दुनिया भर में दबे-कुचले वर्ग आगे आरहे हैं और अपनी पूरी ताकत के साथ लड़ रहे हैं, खासकर अमेरिका में। उदाहरण के लिए, हमारे देश की फासीवादी सरकार और फासीवादी शक्तियों को भी इससे सबक सीखना चाहिए। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि अगर सरकार जल्द ही देश में सरकारी आतंकवाद और नस्लीय पूर्वाग्रह और हिंसा को नहीं रोकती है, तो यहाँ के लोग विरोध करने के लिए मजबूर होंगे। यह अत्याचारियों के अंत में समाप्त होगा।

    एसडीपीआई दरभंगा जिला कार्यकारिणी सदस्य मोअज्जम मोखतार ने कहा कि गिरफ्तार छात्रों, कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के समर्थन में, पार्टी ने आज बिहार के लगभग सभी जिलों में विभिन्न स्थानों पर तख्तियों का मंचन किया और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। सभी गिरफ्तार राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए और उन सभी को जिन्हें यूएपीए के अधीन किया गया है, उन्हें दिल्ली के दंगों में घृणित बयान देने के साथ-साथ यूएपीए से तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और दिल्ली दंगों में उनकी भूमिका के लिए एक तत्काल जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए। 20 से अधिक जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पार्टी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

  • नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी नें राइट टू इक्वेलिटी-पैराडाइम शिफ्ट विषय पर वेबिनार आयोजित किया।

    राज्य कानून के समक्ष किसी व्यक्ति की समानता या कानून के क्षेत्र में समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा” – प्रतीक प्रकाश बनर्जी – न्यायमूर्ति – कलकत्ता उच्चन्यायालय

    तरन्नुम अतहर
    नोएडा- नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के ऑफ़ लॉ एंड लीगल अफेयर्स ने राइट टू इक्वेलिटी- पैराडाइम शिफ्ट के एक बहुत ही रोचक और प्रासंगिक विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार सत्र के मुख्य अतिथि वक्ता कलकत्ता उच्चन्यायालय के न्यायमूर्ति प्रतीक प्रकाश बनर्जी थे।
    सत्र की शुरुआत बैद्यनाथ मुखर्जी, सहायक प्रोफेसर स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स द्वारा की गई, तथा स्वागत भाषण कुलपति प्रो. (डॉ) जयानंद द्वारा दिया गया। इस सत्र में २५० से भी ज्यादा छात्रों ने भाग लिया।
    मुख्य अतिथि वक्ता न्यायमूर्ति प्रतीक प्रकाश बनर्जी ने अपने भाषण में समानता के विषय पर अपने गहन ज्ञान से श्रोताओं और छात्रों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

    उन्होंने भारतीय संविधान में समानता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इतिहास ने धर्म, जाति, लिंग, भाषा और कई अन्य आधारो पर अपूरणीय अन्याय और विभाजन देखा है। इसलिए, भारत असमान लोगों के कुछ वर्गों को विशेषा धिकार देने और दूसरों को अधीन करने, तत्कालीन समाज में प्रचलित लोगों के कारण विशेषाधिकार प्राप्त करने का समाज था।
    ऐसी सामाजिक स्थिति को सुधारने के लिए, असमानता की अवधारणा को अनुच्छेद 14 के तहत संविधान में आयात किया गया था।

    उन्होंने भारत के संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से कहा गया है, कि नागरिकों की स्थिति और अवसर की समानता को सुरक्षित किया जाएगा । अतः समानता भारतीय राज्य का मूलभूत लक्ष्य बन गया। न्यायमूर्ति प्रतीक प्रकाश बनर्जी ने आगे कहा कि “कानून के समक्ष समानता- का मतलब है कानून के सामने समानता और सबके लिए कानून की समान सुरक्षा। अवधारणा यह है कि सभी मनुष्य जन्म से समान होते हैं, इसलिए कानून के सामने समान हैसियत के पात्र हैं। राज्य कानून के समक्ष किसी व्यक्ति की समानता या कानून के क्षेत्र में समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा”

    समानता एक अधिकार है, जिसे अवैधता में दावा नहीं किया जा सकता है और इसलिए, एक नागरिक या अदालत द्वारा नकारात्मक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता है।
    इस प्रकार अनुच्छेद 14 दो अभिव्यक्तियों “कानून के समक्ष समानता” और “कानून कI समान संरक्षण” का उपयोग करता है। साथ ही, उन्होंने यह भी चर्चा की कि दोनों अभिव्यक्तियाँ समानता की अवधारणा के अभिन्न अंग हैं
    इसके बाद श्री बैद्यनाथ मुखर्जी द्वारा आयोजित प्रश्न और उत्तर दौर का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न प्रतिभागियों ने माननीय वक्ता के सामने अपनी शंकाओं और विचारों को रखा।
    कार्यक्रम के अंत में वेबिनार के संयोजक डॉ. परंतपदास, एच ओ डी, स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी एवं मिस प्राची श्रीवास्तव – असिस्टेंट प्रोफेसर – स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स, एन. आई .यू द्वारा अतिथि वक्ता को वोट ऑफ थैंक्स दिया गया. यह वेबिनार एक बहुत ही सफल कार्यक्रम सिद्ध हुआ और अपने उदेशय में परिपूर्ण रहा I

  • पूर्वी लद्दाख में चीन के मूवमेंट और मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्र को भेजा रिपोर्ट

    नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी तनाव के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्र को एक डिटेल रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह बड़ी ही तेजी से चीन वहां पर मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहा है और अपने जवानों को ला रहा है।
    सुरक्षा एजेंसियों की इस रिपोर्ट में पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी, पैंगांग झील जैसे इलाकों में चीन के मूवमेंट की जानकारी का विस्तार से जिक्र किया गया है।

    3-4 दिन से एलएसी के पास गतिविधियां कम हुईं
    चीन की सेना की गतिविधियां एलएलसी के करीब बेहद कम हो चुकी है। यानी कोई बड़ी गतिविधि चीनी सेना की ओर से देखने को नहीं मिली है। सूत्रों ने बताया कि चीन की सेना के जवान पिछली पोजिशन के मुकाबले अब सौ यार्ड पीछे खिसक चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसा कोई आक्रामक रवैया भी नहीं दिखाया है। न ही सैनिकों की संख्या में किसी तरह का इजाफा देखने को मिला है।

    6 जून को फिर दोनों देशों की सेनाओं में बैठक
    सीमा विवाद के बीच भारत-चीन में 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत होगी। न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से 14वीं बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह चर्चा में शामिल होंगे।
    न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच मंगलवार को भी बातचीत हुई थी। लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर अब तक 10 बार चर्चा हो चुकी है।

    आईटीबीपी ने भारत-चीन सीमा की देखभाल के लिए 2 नए हेडक्वार्टर बनाए
    इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) ने गुरुवार को चंडीगढ़ और गुवाहाटी में दो कमांड हेडक्वार्टर बनाने का आदेश जारी किया है। चंडीगढ़ हेडक्वार्टर का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे जो एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) के रूप में काम करेंगे। वह लद्दाख, लेह और श्रीनगर के इलाकों की देखभाल करेंगे। गुवाहाटी सेक्टर उत्तर-पूर्वी भागों की देखरेख करेगा। पिछले साल अक्टूबर में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 60 अतिरिक्त पदों के साथ आईटीबीपी के लिए दो नए हेडक्वार्टर को मंजूरी दी थी।

  • सीएए-एनआरसी-एनपीआर विरोधी आंदोलन के गिरफ्तार सभी कार्यकर्ताओं को रिहा करे मोदी सरकार-माले

    *लोकतांत्रिक अधिकारों व आवाज पर दमन बंद हो – इंसाफ मंच

    *सब याद रखा जायेगा राष्ट्रीय अभियान के तहत मुजफ्फरपुर के विभिन्न क्षेत्रों में कई संगठनों व लोगों का प्रतिवाद।

    प्रेस विज्ञप्ति, मुजफ्फरपुर, 3जून 2020

    सीएए-एनआरसी-एनपीआर विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा लोकतांत्रिक आवाजों पर दमन के खिलाफ देशव्यापी विरोध दिवस के तहत भाकपा-माले, इंसाफ मंच, ऐपवा व अन्य संगठनों ने मुजफ्फरपुर में भी प्रतिवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान मांग की गई की लाॅकडाउन के दौरान दिल्ली व यूपी में गिरफ्तार किए गए सीएए-एनआरसी-एनपीआर विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए, प्रतिवाद की लोकतांत्रिक आवाजों पर दमन बंद किया जाए, सभी राजनीतिक कैदियों सहित चर्चित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान को रिहा किया जाए तथा दिल्ली हिंसा के असली अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए।

    भाकपा-माले जिला कार्यालय में आयोजित प्रतिवाद कार्यक्रम में माले जिला सचिव कृष्णमोहन, इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष आफताब आलम व जफर आजम, चर्चित बुद्धिजीवी प्रो अरविंद कुमार डे, ऐक्टू के जिला संयोजक मनोज यादव, रसोईया संघ के जिला सचिव परशुराम पाठक, आइसा-इनौस के शफीकुर रहमान, राजकिशोर प्रसाद, धनंजय कुमार तथा शहर के अन्य क्षेत्रों में ऐपवा की प्रो.मीरा ठाकुर व निर्मला सिंह सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान पिछले दो महीने में दिल्ली पुलिस ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर विरोधी आंदोलन में शामिल होने के आरोप में जामिया के छात्र सफूरा जरगर, मीरान हैदर, आसिफ इकबाल, जेएनयू की छात्राएं नाताशा नरवाल और देवांगना सहित इशरत जहां, खालिद सैफी, शर्जील इमाम,शिफाउर रहमान जैसे कार्यकर्ताओं और अन्य सैकड़ों मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार कर लिया है। हाल ही में एएमयू के छात्र फरहान जुबैरी और रवीश अली को यूपी पुलिस ने सीएए के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया है। लेकिन दिल्ली में सीएए के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा भड़काने वाले भाजपा नेता कपिल मिश्रा, प्रवेश शर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे लोग बिना किसी कारवाई के निर्भिक घूम रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले छात्र-नौजवानों व बुद्धिजीवियों पर दमन चलाने व गिरफ्तार करने के बदले मोदी सरकार को कोरोना संकट और लाॅकडाउन से तबाह और मर-खप रहे मजदूरों, गरीबों, आमलोगों को बचाने में सत्ता का उपयोग करना चाहिए। मुजफ्फरपुर में फिर चमकी बुखार से बच्चे बीमार हो रहें हैं और कई की जान जा चुकी है। ऐसे दौर में पिछले साल चमकी बुखार से बच्चों को बचाने के यूपी के चर्चित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान मुजफ्फरपुर के गांव-पंचायतों में कैंप लगा कर इलाज में जुटे थे। लेकिन उन्हें सीएए विरोधी आंदोलन के कारण जेल में बंद कर दिया गया है। उन्हें यूपी सरकार बच्चों के हित में अविलंब रिहा करे।

  • BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा में दिखे कोरोना संक्रमण के लक्षण,हॉस्पिटल में हुए भर्ती

    गुड़गांव:भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता कोरोना लक्षणों के चलते मेदांता हॉस्पिटल में एडमिट है। बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे उन्हें वहां भर्ती किया गया। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इस मामलें में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

    आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी मरीज को एडमिट करने से पहले कोविड-19 टेस्ट करवाया जाता है। पात्रा का भी कोरोना टेस्ट हुआ है। अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। ऐहतियात के तौर पर फिलहाल संबित पात्रा को हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल पर स्थित वार्ड में रखा गया है।

    भाजपा प्रवक्ता होने के साथ-साथ डॉक्टर भी हैं पात्रा

    संबित पात्रा भाजपा के प्रवक्ता होने के साथ-साथ मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वे एमबीबीएस के साथ-साथ मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) भी हैं। 2003 में उन्होंने यूपीएससी की कंबाइंड मेडिकल सर्विस परीक्षा पास की थी और दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में बतौर मेडिकल ऑफिसर ज्वाइन किया था।

    लोकसभा चुनाव हार गए थे संबित

    इसके बाद संबित भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बन गए। वह ओडिशा के रहने वाले हैं। उन्होंने 2019 में पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन बीजू जनता दल के उम्मीदवार पिनाकी मिश्र से हार गए थे।(इनपुट भास्कर)

  • लॉकडाउन के कारण घर गए बच्चे जिले में ही दे सकेंगे CBSE 10-12वीं की परीक्षा,स्कूल को देनी होगी जानकारी

    केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं के सेंटर से जुड़ी बड़ी राहत की घोषणा की। निशंक ने ट्वीट करके कहा कि कोरोना संकट के कारण जो बच्चे अपने गृह प्रदेश चले गए हैं और अपने बोर्ड परीक्षा के सेंटर वाले जिले में नहीं हैं ऐसे छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा अपने गृह जिले में ही दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने स्कूल को जिले और करीब के सेंटर की जानकारी देनी होगी।

    CBSE बोर्ड की परीक्षाएं 1 से 15 जुलाई 2020 के बीच आयोजित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री निशंक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

    जून के पहले सप्ताह में सेंटर पता चलेगा
    निशंक ने कहा कि बच्चों की परेशानी को देखते हुए ये फैसला किया गया है। अब बच्चों को चाहिए कि वे जल्दी से जल्दी अपने स्कूल से सम्पर्क करके उन्हें अपने गृह जिले के बारे में यह बताएं कि आप वहीं रहकर बाकी के पेपर्स देना चाहते हैं। स्कूल और विभाग इसकी पूरी व्यवस्था करके जून के प्रथम सप्ताह तक बच्चों को सेंटर की जानकारी दे देंगे।

    29 विषयों की परीक्षाएं बाकी हैं

    कोरोना लॉकडाउन के कारण सीबीएसई ने 83 विषयों की परीक्षाएं रोक दी थीं। इसके बाद बोर्ड ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि इन 83 विषयों में से 29 विषयों की ही परीक्षाएं होंगी। ये वही विषय होंगे, जो अगली क्लास में जाने के लिए जरूरी हैं।

    एडमिट कार्ड भी नहीं बदलेंगे
    सीबीएसई के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एडमिट कार्ड वही रहेंगे। कारण, अब अलग-अलग स्टूडेंट्स के अलग-अलग पेपर हैं और हर पेपर में स्टूडेंट्स की संख्या भी कम है। अधिकतर स्टूडेंट्स के हिंदी कोर, हिंदी इलेक्टिव जैसे पेपर शेष रहे हैं। मेन स्ट्रीम के पेपर पूरे हो चुके हैं। वहीं, कॉमर्स साइड का एक पेपर बिजनेस स्टडीज का बचा है।

    होम साइंस, भूगोल और बायो टेक्नोलॉजी के साथ ही आईटी के कुछ पेपर हैं। ये ऐसे पेपर हैं, जिनमें स्टूडेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होती। उत्तर पूर्वी दिल्ली को छोड़कर बाकी इंडिया में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, बायोलॉजी, लिट्रेचर सहित विभिन्न मेन स्ट्रीम के पेपर हो चुके हैं।

    फिजिकल डिस्टेंसिंग का रखा जाएगा ख्याल

    परीक्षा केंद्रों पर सीबीएसई कोशिश कर रहा है कि स्टूडेंट्स के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग मेंटेन रखी जाए। 12वीं के जो पेपर शेष रहे हैं, उनमें स्टूडेंट्स कम हैं। सीबीएसई की डेटशीट में भी यह कोशिश की गई है कि एक दिन एक ही विषय का पेपर हो। ऐसे में स्टूडेंट्स की संख्या कम होने पर फिजिकल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने के लिए परीक्षा केंद्र पर अन्य कक्षों में भी स्टूडेंटस को शिफ्ट किया जा सकता है।

  • भारत में ईद रही सूनी,लाकडाऊन का पालन करते हुए लोगों ने घरों में ही अदा की ईद की नमाज

    कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने इस बार ईद को भी फीका कर दिया. सोशल डिस्टेंसिंग की लक्ष्मण रेखा ने लोगों को गले लगकर बधाई देने और खुशियां बांटने तक का मौका नहीं दिया. लोग ना तो बाजारों में नजर आए और ना ही मस्जिदों में.

    सड़कों से लेकर मस्जिदों तक में सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. लोगों ने घरों पर ही रहकर इबादत की. मस्जिदों में भी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करते दिखे.

    दिल्ली की जिस जामा मस्जिद में ईद पर भारी संख्या में लोग जमा होते थे, इस बार वहां भी कोई चहलकदमी नहीं दिखी.

    पुरानी दिल्ली की सड़कों पर हर तरफ भीड़ ही भीड़ नजर आया करती थी लेकिन इस बार सब कुछ अलग था. इक्का-दुक्का लोग ही मास्क पहन सड़कों पर दिखाई दिए लेकिन उनके चेहरे पर भी मायूसी ही थी.

    ईद की सेवइयों में इस बार ना तो वो मिठास रही और ना ही पहले जैसा उत्साह. शायद ही पहले किसी ने ईद पर पूरी दुनिया में पसरे ऐसे सन्नाटे की कल्पना की होगी.

    संक्रमण फैलने के डर से सरकार ने मस्जिदों में लोगों के इकट्ठा होकर नमाज पढ़ने पर रोक लगा रखी है. वायरस का डर इतना ज्यादा है कि लोग गले मिलना तो दूर हाथ मिलाने से भी कतरा रहे हैं(इनपुट आजतक)

  • इस लोक डाउन में कैसे पढे़ं ईद की नमाज़

    ख़ुर्रम मलिक

    कोरोना वायरस की वजह से आज पुरा विश्व एक अजीब सी परिस्थिति से गुज़र रहा है. और इस का असर हर ओर देखा जा सकता है. इस महामारी की वजह से जहाँ स्कूल कॉलेज, बाज़ार बंद हैं वहीं दूसरी ओर मस्जिद मंदिर गिर्जा गुरुद्वारा बंद पड़े हैं. और ऐसे में मुसलमानों का पवित्र महीना रमज़ान भी आया जिस में मुसलमानों ने पुरी तरह सरकार और प्रशासन का सहयोग करते हुए अपने अपने घरों में ही नमाज़ ए तरावीह पढी़ ,और फिर देखते ही देखते यह पवित्र महीना भी गुज़रने को है. और उम्मीद की जा रही है के 25 मई सोमवार को मुसलमानों का पवित्र त्यौहार ईद उल फ़ितर मनाया जाएगा. जैसा के हम सब जानते हैं कि यह पवित्र त्यौहार रमज़ान में किये गए इबादतों का बदला है जिसे अल्लाह ने खुश हो कर मुसलमानों को दिया है.

    और जिस की नमाज़ ईद गाह में होती है. लेकिन इस साल कोरोना वायरस की वजह से ईद की नमाज़ घरों में ही पढ़नी है. हम यहाँ आप को यह बताना चाहते हैं कि कैसे ईद की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा है. सब से पहले तो हमें किसी भी नमाज़ की नियत करनी होती है. वैसे नियत दिल से होनी चाहिए. अगर ज़ुबान से बोल दिया तो और भी अच्छा है.

    नियत इस तरह करना है.

    नियत करता हूँ मैं नमाज़ ईद उल फ़ितर की वाजिब. छे ज़ाएद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह त’आला के. रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़.
    नियत के बाद तक्बीर ए तहरीमा (हाथों को कंधे तक उठाना है और फिर पेट पर बांध लेना) के बाद सना पढ़ना है उस के बाद दो और तक्बीर कही जाएगी. पहली तक्बीर के बाद हाथों को कंधे तक ले कर जा कर छोड़ देना है, फिर दूसरी बार भी ऐसा ही करना है. तीसरी तक्बीर के बाद हाथों को बांध लेना है और सुरह फ़ातिहा और उस के बाद कोई भी सुरह पढ़ना है. उस के बाद रुकु में जाना है फिर सज्दे में और इस तरह एक रकत पूरी करनी है.

    दूसरी रकत के लिये खड़े होंगे तो सब से पहले सुरह फ़ातिहा और फिर कोई सुरह मिलाएंगे और उस के बाद रुकु में जाने से पहले पहले तीन ज़ाएद तक्बीरें (अल्लाह हु अकबर) कहते हुए हाथ छोड़ देंगे और और चौथी तक्बीर कह कर रुकु में जाएंगे और सजदा के साथ सलाम फेर कर नमाज़ मुकम्मल करेंगे. नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा. नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा। यह दो है.
    ईद उल फ़ितर का खु़त्बा यह है.

    खु़त्बा सुनना वाजिब है.

    पहला खु़त्बा –
    अल्लाह हु अकबर ,अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर,

    अल्हम्दु लिल्लाही रब्बिल आ लमीन वस सलातु अला सय्येदेना मुहम्मदिन खा़तिमिन नबीय्यीन. व’अला आ’लिही व’अस’हाबिही अज्म’ईन,अम्मा बा’द, फ़क़द क़ालल्लाहु त’आला ,क़द अफ़्लहा मन त’ज़क्का, व’ज़करस्मा रब्बिही फ़सल्ला, बल तु’सिरुनल हयातअद दुनिया, वल’आखि़रतु खै़रु व’अब्क़ा, इनना हाज़ा लफ़िस सुहुफ़िल ऊला, सुहुफ़ी इब्राहीमा वमुसा, वक़ाला रसुलुल्लाह सo अo वo इनना लिकुल्ली क़ौमिन ईदन वहाज़ा ईदुना, बा’रकल्लाहु लना वलकुम फ़िल्क़ुराआन इल अज़ीम, वनफ़ाना व’इय्याकुम बिहदी सय्येदिल मुरसलीन

    दूसरा खु़त्बा-
    अल्लाह हु अकबर ,अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर,
    अल्हम्दु लिल्लाही नहमदुहू व’नस्तईनुहु व’नस्तग्फ़िरुहु ,वनु मिनु बिही, व’नतवक्कलु अलैही ,व’न’ऊज़ु बिल्लाही मिन शुरुरी अन्फ़ुसिना व’मिन सैय्येआती आमालिना ,वनश्हदु अल्लाह ही लाहा इल’ल्लाहु ,व’नश’हदु अन्ना मुहम्मदन रसुलुल्लाह, व’अला आलिही व’सहबिही ,व’बारका व’सल्लम, अम्मा बाद, क़ाला रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम, ज़कातुल फ़ितरी तुहरत उन लिस’साइमी मिनल लग़वी वर’रफ़सी व’तोमत उन लिल मसाकीनी औ कमा क़ाला अलैहिस सलामो, व’क़ाला त’आ’ला ,इननललाहा या’मुरु बिल अदली वल इहसानी व’ईता’ई ज़िल क़ुरबा व’यन्हा अन’इल फ़हशाई वल’मुन्करि वल’बग्यि़ , य’ईज़ुकुम ल’अल्लकुम तज़्कुरून, वलज़िक्रुल्लाही अकबर.

    यह है दोनों खु़त्बा जिसे लोक डाउन की वजह कर छोटा किया गया है. जिस से के कोई भी अरबी ज़ुबान का जानकार इसे पढ़ सकता है.

    इस लिए आप सभी मुसलमान भाई से यह गुज़ारिश है के ईद उल फ़ितर की नमाज़ घरों में पढे़ं ,अगर किसी को नमाज़ पढ़ना नहीं आये तो वह चाश्त की नमाज़ पढ़ ले.

    ख़ुर्रम मलिक इस्लामिक स्कॉलर और स्वतंत्र पत्रकार है। ये लेखक के निजी और व्यक्तिगत विचार हैं